मूक -बधिर कलाकारा ें की नृत्य, गीत अभिनय विधा व का ेरिया ेग्राफी(एक अध्ययन)

या ेगेंन्द्र सिह नरुका फूलैता
2017 Zenodo  
सुर व संगीत के बिना सामान्य कलाकारों क े लिए नृत्य करना मुश्किल कार्य ह ै लेकिन मूक-बधिर कलाकारों क े लिए यह उतना ही सहज ह ैं। मूक-बधिर कलाकारा ें क े लिए सुर व संगीत का का ेई प ्रया ेजन नहीं ह ै। यह कलाकार संगीत की किसी तान पर नहीं थिरकते अपितु यह अपने कोरिया ेग्राफर र्के इ शारा ें पर थिरकते ह ै।इनकी नृत्य विधा डान्स विदआऊट म्यूजिक की धारणा पर आधारित होती ह ैं।मूक-बधिरांे की सा ंकेतिक भाषा का अच्छा ज्ञान रखने वाला क ेारिया ेग्राफर इन्ह े नृत्य में पारंगत बना सकता है। मूक-बधिर कलाकार भारतीय
more » ... र कलाकार भारतीय शास्त्रीय नृत्य विधा को आसानी से समझ सकते ह ैं,क्या ेकि भारतीय शास्त्रीय संगीत में जितना महत्व संगीत का ह ै, उतना ही महत्व आंगिक हाव-भाव का भी ह ैं।भारतीय शास्त्रीय नृत्य -नाटिकाओं का विषय समझने क े बाद नाटिका का बिना सुर-संगीत के भी रसास्वादन किया जा सकता है। मूक-बधिर कलाकारों का े नृत्य विध्ाा सिखाने से प ूर्व कोरिया ेग्राफर का े कुछ आवश्यक तैयारियाँ करनी होती ह ैं। जिस गीत पर मूक-बधिर कलाकारा ंे को नृत्य सिखाना ह ैं उसके सभी चरण का ेरिया ेग्राफर का े याद करना हा ेता है तथा गीत का सरल स ंाक ेतिक भाषा मे रूपान्तरण करना होता ह ै। का ेरिया ेग्राफर गीत सुनता है तथा उसक े अनुसार मूक-बधिर कलाकारों की सा ंकेतिक भाषा में का ेरिया ेग्राफी करता ह ै।मूक-बधिर कलाकारों व कोरिया ेग्राफर क े सुन्दर सामन्जस्य से सामान्य दर्श का ें म ें यह भ्रम प ैदा किया जा सकता ह ैं कि यह कलाकार गीत-संगीत सुनकर न ृत्य कर रहें ह ै ं।
doi:10.5281/zenodo.886097 fatcat:cfm3kpg4wffrbenbb5dcq6gcfm